आजकल लोग जब घर बनवाना शुरू करते हैं, तो अपने मन मुताबिक कहीं पर भी पानी के लिए बोरिंग जगह बना देते हैं। इससे यह होता हैं कि घर में दुखों का आना शुरू हो जाता है।
शास्त्र के अनुसार यदि घर में बोरिंग सहीं जगह पर है। तो उस घर का स्वामी यानी की मालिक ताकतवर, धनवान होता है, साथ ही वह शांति और पुण्य प्रताप से आगे बढता है।
पानी के लिए बोरिंग प्लाट के उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में ही कराना चाहिए। क्योंकि ऐसा माना जाता है, कि ईशान का अर्थ ईश्वर से जुड़ा हुआ है।
यह ध्यान में रखें जो आपका प्लाट है उसमें उत्तर पूर्व की दिशा में ढलान होना चाहिए। वो इसलिए कि जब बरसात हो तो आपके घर का सभी पानी उत्तर-पूर्व की ओर बहे।
अगर घर के मालिक ने आग्नेय कोण (पूर्व और दक्षिण के मध्य) में बोरिंग करा दी है, तो गृह स्वामी या उद्योगपति पर भारी मुसीबतें आती हैं। जैसे- बच्चों को कष्ट, अचानक धन हानि, बिजली से संबंधित दुर्घटना|
घर मालिक के लिए यह भी जानना बहुत जरूरी है, कि वायव्य कोण क्या होता हैं।वायव्य कोण यानी उत्तर और पश्चिम के बीच की दिशा होती है। इसके अलावा घर में जीवन शक्ति का भी नुकशान होता है।
पानी की टंकी को पश्चिम दिशा अथवा भवन के नैऋत्य दिशा के क्षेत्र में रखना चाहिए। नैऋत्य दिशा दक्षिण पश्चिम कोण को कहते हैं।